Bhagat Singh Shaheedi Diwas): आज ही के दिन (23 मार्च) भगत सिंह हसते हसते फांसी चड़ गए थे

Bhagat Singh Shaheedi Diwas जब भगत सिंह हसते हसते चड़ गए थे फांसी
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Bhagat Singh Death Anniversary (Shaheedi Diwas) : शहीद भगत सिंह (Bhagat Singh) भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांन्तिकारी थे. उन्हें किसी भी परिचय की दरकार नहीं है. भगत सिंह कम उम्र में ही भारतवर्ष की खातिर शहीद हो गए थे. उनके लिए मातृभूमि से बढ़कर कुछ नहीं था. अपनी आखिरी सांस तक उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए संघर्ष किए और अपनी जान को दांव पर लगा दी. भगत सिंह का जन्म 28 दिसंबर 1907 को गांव बंगा, जिला लायलपुर, पंजाब (अब पाकिस्तना में) में हुआ था. दिल्ली के सेंट्रल असेम्बली में बम फेंककर इन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य को खुले आम चुनौती दी. इस घटना के बाद अंग्रेज सरकार ने इन्हें 23 मार्च 1931 को फांसी पर लटका दिया. भगत सिंह के दो अन्य साथियों राजगुरु और सुखदेव को भी फांसी दे दी गई. आज (23 मार्च) शहीद भगत सिंह की पुण्यतिथि पर पढ़ें उनके कुछ अनमोल और प्रेरणादायी विचारों के बारे में जो युवाओं के लिए किसी प्रेरणास्रोत से कम नहीं हैं.

Bhagat Singh Shaheedi Diwas: भारत की आजादी की लड़ाई

भारत के सबसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद भगत सिंह भारत देश की महान विभूति है, मात्र 23 साल की उम्र में इन्होंने अपने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए. भारत की आजादी की लड़ाई के समय भगत सिंह सभी नौजवानों के लिए यूथ आइकॉन थे, जो उन्हें देश के लिए आगे आने को प्रोत्साहित करते थे. भगत सिंह सिख परिवार में जन्मे थे, बचपन से ही उन्होंने अपने आस पास अंग्रेजों को भारतियों पर अत्याचार करते देखा था, जिससे कम उम्र में ही देश के लिए कुछ कर गुजरने की बात उनके मन में बैठ चुकी थी. उनका सोचना था, कि देश के नौजवान देश की काया पलट सकते है, इसलिए उन्होंने सभी नौजवानों को एक नई दिशा दिखाने की कोशिश की. भगत सिंह का पूरा जीवन संघर्ष से भरा रहा, उनके जीवन से आज के नौजवान भी प्रेरणा ग्रहण करते है.

भगत सिंह जीवन परिचय  (Bhagat Singh Biography in Hindi )

क्रमांकजीवन परिचय बिंदुभगत सिंह जीवन परिचय
1.       पूरा नामशहीद भगत सिंह
2.       जन्म27 सितम्बर 1907
3.       जन्म स्थानजरंवाला तहसील, पंजाब
4.       माता-पिताविद्यावती, सरदार किशन सिंह सिन्धु
5.       भाई – बहनरणवीर, कुलतार, राजिंदर, कुलबीर, जगत, प्रकाश कौर, अमर कौर, शकुंतला कौर
6.       मृत्यु23 मार्च 1931, लाहौर

भगतसिंह का बचपन (Life of Shaheed Bhagat Singh)

भगतसिंह जब चार-पांच वर्ष के हुए तो उन्हें गांव के प्राइमरी स्कूल में दाखिला दिलाया गया. भगतसिंह अपने दोस्तों के बीच बहुत लोकप्रिय थे. उन्हें स्कूल की चारदीवारी में बैठना अच्छा नहीं लगता था बल्कि उनका मन तो हमेशा खुले मैदानों में ही लगता था.

भगतसिंह की शिक्षा (Education of Shaheed Bhagat Singh)

प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के पश्चात भगतसिंह को 1916-17 में लाहौर के डीएवी स्कूल में दाखिला दिलाया गया. वहां उनका संपर्क लाला लाजपतराय और अम्बा प्रसाद जैसे देशभक्तों से हुआ. 1919 में “रॉलेट एक्ट”( Rowlatt Act) के विरोध में संपूर्ण भारत में प्रदर्शन हो रहे थे और इसी वर्ष 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग काण्ड हुआ .

शहीद भगत सिंह की फांसी (Bhagat Singh Death Reason)

भगत सिंह खुद अपने आप को शहीद कहा करते थे, जिसके बाद उनके नाम के आगे ये जुड़ गया. भगत सिंह, शिवराम राजगुरु व सुखदेव पर मुकदमा चला, जिसके बाद उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई, कोर्ट में भी तीनों इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते रहे. भगत सिंह ने जेल में रहकर भी बहुत यातनाएं सहन की, उस समय भारतीय कैदियों के साथ अच्छा व्यव्हार नहीं किया जाता था, उन्हें ना अच्छा खाना मिलता था, ना कपड़े. कैदियों की स्थिति को सुधार के लिए भगत सिंह ने जेल के अंदर भी आन्दोलन शुरू कर दिया, उन्होंने अपनी मांग पूरी करवाने के लिए कई दिनों तक ना पानी पिया, ना अन्न का एक दाना ग्रहण किया. अंग्रेज पुलिस उन्हें बहुत मारा करती थी, तरह तरह की यातनाएं देती थी, जिससे भगत सिंह परेशान होकर हार जाएँ, लेकिन उन्होंने अंत तक हार नहीं मानी. 1930 में भगत जी ने Why I Am Atheist नाम की किताब लिखी.

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23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को फांसी दे दी गई. कहते है तीनों की फांसी की तारीख 24 मार्च थी, लेकिन उस समय पुरे देश में उनकी रिहाई के लिए प्रदर्शन हो रहे थे, जिसके चलते ब्रिटिश सरकार को डर था, कि कहीं फैसला बदल ना जाये, जिससे उन लोगों ने 23 व 24 की मध्यरात्रि में ही तीनों को फांसी दे दी और अंतिम संस्कार भी कर दिया.

शहीद भगत सिंह के अनमोल विचार (Shaheed Bhagat Singh Hindi Quotes)- 

  • ‘जिन्दा रहने की हसरत मेरी भी है, पर मै कैद रहकर अपना जीवन नहीं बिताना चाहता’
  • ‘मरकर भी मेरे दिल से वतन की उल्फत नहीं निकलेगी, मेरी मिट्टी से भी वतन की ही खुशबू आएगी’हूँ’
  • ‘राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है। मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आजाद है।’
  • ‘मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है।’
  • ‘ मेरे सीने पर जो जख्म हैं, वो सब फूलों के गुच्छे हैं, हमको पागल रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।’
  • ‘आज जो मै आगाज लिख रहा हूँ, उसका अंजाम कल आएगा. मेरे खून का एक एक कतरा कभी तो इन्कलाब लाएगा।’
  • ‘जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।’
  • ‘जरूरी नहीं था कि क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो। यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं था।’
  • ‘व्यक्तियो को कुचल कर , वे विचारों को नहीं मार सकते।’
  • ‘प्रेमी, पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं।’
  • ‘देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं।’
  • ‘बड़े बड़े साम्राज्य तहस नहस हो जाते हैं, पर विचारों को कोई ध्वस्त नहीं कर सकता’
  • ‘अगर आपको मेरे (भगत सिंह के अनमोल वचन) प्रेरित करते हैं तो बदलाव लाने की हिम्मत करते समय बिलकुल मत सोचिये’
  • ‘अगर अपने दुश्मन से बहस करनी है और उससे जीतना है तो इसके लिए अभ्यास करना जरूरी है।’
  • ‘मुसीबतें इंसान को पूर्ण बनाने का काम करती हैं, हर स्थिति में धैर्य बनाकर रखें।’
  • ‘मेरे जीवन का केवल एक ही लक्ष्य है और वो है देश की आज़ादी. इसके अलावा कोई और लक्ष्य मुझे लुभा नहीं सकता’
  • ‘जो व्यक्ति उन्नति के लिए राह में खड़ा होता है उसे परम्परागत चलन की आलोचना एवम विरोध करना होगा साथ ही उसे चुनौती देनी होगी।’
  • ‘क्रांति मनुष्य का जन्म सिद्ध आधिकार है साथ ही आजादी भी जन्म सिद्ध अधिकार है और परिश्रम समाज का वास्तव में वहन करता है।’
  • ‘किसी भी इंसान को मारना आसान है, परन्तु उसके विचारों को नहीं। महान साम्राज्य टूट जाते हैं, तबाह हो जाते हैं, जबकि उनके विचार बच जाते हैं।’

जलियाँवाला बाग हत्याकांड का भगत सिंह पर प्रभाव

13 अप्रैल 1919, यह वह दिन था। जिस दिन कुछ ऐसा हुआ। जिसने भगत सिंह के दिल और आत्मा को झकझोर कर रख दिया। उनके मन में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आक्रोश भर दिया। क्योंकि इस दिन भारत के इतिहास का, सबसे क्रूर नरसंहार हुआ था। यह घटना भारत के पंजाब प्रांत में, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के निकट स्थिति जलियांवाला बाग हत्याकांड की थी। जिसमें अंग्रेज अधिकारी जनरल डायर ने, रोलेट एक्ट के विरोध में हो रही।

एक सभा पर, बिना किसी चेतावनी के  भीड़ में खड़े हजारों निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवा दी थी। इस घटना में अनाधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1000 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे। जब भगत सिंह ने इस घटना के बारे में सुना। तो वह 20 किलोमीटर पैदल चलकर, घटना वाली जगह पर पहुंच गए। वहां पहुंच कर, उन्होंने जो भी देखा। वह बहुत दर्दनाक था। उस दिन से उन्होंने उन सब शहीदों का बदला लेने की ठान ली। खून से सनी हुई, मिट्टी मुट्ठी में भरकर

Bhagat Singh Shaheedi Diwas: जेल में भी कैदियों के लिए प्रदर्शन करते रहे भगत सिंह

कैदियों के लिए बेहतर रहने की स्थिति की मांग करते हुए, जेल में उनका समय विरोध प्रदर्शन में बीता. इस समय के दौरान, उन्हें जनता की सहानुभूति प्राप्त हुई, खासकर जब वे साथी प्रतिवादी जतिन दास के साथ भूख हड़ताल में शामिल हुए. सितंबर 1929 में दास की भूख से मौत के साथ हड़ताल समाप्त हो गई. दो साल बाद, भगत सिंह को दोषी ठहराया गया और 23 साल की उम्र में फांसी दे दी गई.

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Bhagat Singh Shaheedi Diwas: करीब दो साल जेल में रहे भगत सिंह

जेल में करीब दो साल रहने के दौरान भगत सिंह क्रांतिकारी लेख लिखा करते थे और अपने विचारों को व्यक्त करते थे। उनके लेखों में अंग्रेजों के अलावा कई पूंजीपतियों के नाम भी शामिल थे, जिसे वह अपना और देश का दुश्मन मानते थे। भगत सिंह ने अपने एक लेख में लिखा था कि मजदूरों का शोषण करने वाला उनका शत्रु है, वह चाहे कोई भारतीय ही क्यों न हो।


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