DeepFake Technology [Hindi] | आसान भाषा में जाने क्या है डीपफेक टेक्नोलॉजी, इससे बचने के किन AI टूल का करें इस्तेमाल

DeepFake Technology आसान भाषा में जाने क्या है डीपफेक टेक्नोलॉजी
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Deepfake Technology ये टेक्नोलॉजी ऐसी एल्गोरिदम और पैटर्न को लर्न करती है जिसका इस्तेमाल मौजूदा इमेज या वीडियो में हेरफेर करके उसके और ज्यादा रियल बनाने में किया जाता है। नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को डीप फेक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटलीजेंस (AI) के दुरुपयोग को चिह्नित किया और कहा कि मीडिया को इस संकट के बारे में लोगों को शिक्षित करना चाहिए।

नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को डीप फेक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटलीजेंस (AI) के दुरुपयोग को चिह्नित किया और कहा कि मीडिया को इस संकट के बारे में लोगों को शिक्षित करना चाहिए।

क्या है डीपफेक टेक्नोलॉजी

डीपफेक शब्द ‘Deep Learning’ और ‘Fake’ के मेल से बना है। डीप फेक टेक्नोलॉजी की मदद से किसी दूसरे की फोटो या वीडियो पर किसी सेलिब्रिटी वीडियो के फ़ेस के साथ फेस स्वैप कर दिया जाता है। ये देखने में बिलकुल असली वीडियो या इमेज की तरह दिखती है।

ये टेक्नोलॉजी ऐसी एल्गोरिदम और पैटर्न को लर्न करती है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा इमेज या वीडियो में हेरफेर करके उसके और ज्यादा रियल बनाने में किया जाता है। इससे बनी वीडियो और इमेज पर लोग आसानी से भरोसा भी कर लेते हैं। ये टेक्नोलॉजी Generative Adversarial Networks (GANs) का इस्तेमाल करती है जिससे फेक वीडियो और इमेज बनाये जाते हैं।

कब और कैसे शुरू हुई डीपफेक टेक्नोलॉजी (Deepfake Technology)

‘डीपफेक’ शब्द पहली बार 2017 के अंत में एक Reddit यूजर द्वारा बनाया गया था, जिसने अश्लील वीडियो पर मशहूर हस्तियों के चेहरे को सुपरइम्पोज करने के लिए डीप लर्निंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया था। इस घटना ने महत्वपूर्ण ध्यान आकर्षित किया; 2018 तक, ओपन-सोर्स लाइब्रेरी और ऑनलाइन शेयर किए गए ट्यूटोरियल की बदौलत टेक्नोलॉजी इस्तेमाल में आसान हो गई थी। बाद के 2020 के दशक में, डीपफेक अधिक परिष्कृत हो गए और उनका पता लगाना कठिन हो गया।

ऐसे कर सकते हैं डीपफेक की पहचान

अगर आपको लगता है कि कोई वीडियो या इमेज डीपफेक है तो उसमें हुए बदलावों पर नजर डाल सकते हैं। कई बार ऐसी वीडियो में आपको हाथ-पैर कि मूवमेंट पर ज्यादा नजर देनी चाहिए। कुछ प्लेटफॉर्म एआई जनरेटेड कंटेंट के लिए वॉटरमार्क या अस्वीकरण जोड़ते हैं कि कंटेंट एआई से जनरेट किया गया है। हमेशा ऐसे निशान या डिसक्लेमर को ध्यान से चेक करें।

  • ऐसी वीडियो में हाथ-पैर कि मूवमेंट पर रखें नजर
  • कुछ प्लेटफॉर्म AI जनरेटेड कंटेंट के लिए वॉटरमार्क या अस्वीकरण का करते हैं इस्तेमाल
  • ऐसे मार्क या डिसक्लेमर को ध्यान से करें चेक

इन AI टूल (Tools) का कर सकते हैं इस्तेमाल

आजकल बहुत सारे एआई टूल मौजूद हैं जो एआई जनरेटेड कंटेंट को आसानी से पकड़ सकते हैं। AI or Not और Hive Moderation जैसे कई एआई टूल भी काम में आ सकते हैं, जो एआई-जनरेटेड कंटेंट का पता लगा सकते हैं। Deepware Scanner एक ऐसा टूल है जिसकी मदद से आप किसी इमेज या वीडियो को डीपफेक पता करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा भी ढेरों टूल ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

टेक कंपनियां निकाल रही हैं सॉल्यूशन

Deepfake Technology in Hindi पर लगाम लगाने के लिए टेक कंपनियां लगातार काम कर रही हैं. पॉलिसी मेकर, रीसर्चर्स और बड़ी टेक कंपनियां इस टेक्नोलॉजी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसके गलत इस्तेमाल को दूर करने के तरीके ढूंढ़ने के लिए एक्टिवली काम कर रही हैं. 

DeepFake Technology | डीपफेक वीडियो बनाने पर सजा

यदि आप मजाक में किसी का डीपफेक वीडियोज बनाते हैं और शेयर करते हैं तो आपके खिलाफ आईपीसी की धारा के तहत कार्रवाई हो सकती है। भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इसके अलावा यदि किसी की छवि खराब होती है तो आपके खिलाफ मानहानी का भी मामला बनेगा। इस मामले में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ भी आईटी नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है। 

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शिकायत के बाद 36 घंटे के अंदर सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से इस तरह के कंटेंट को हटाना होगा।

डीपफेक पर केंद्र सरकार भी सख्त

DeepFake Technology | इस वायरल वीडियो के बाद सरकार की ओर से भी बयान जारी किया गया है. केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पीएम नरेंद्र मोदी इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले सभी डिजिटल नागरिक की सुरक्षा और भरोसे को सुनिश्चित करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि डीपफेक लेटेस्ट और सबसे खरतनाक और इससे डील करने की जरूरत है.

ओबामा और जुकरबर्ग भी हो चुके है शिकार

अधिकांश डीपफेक वीडियो अश्लील प्रकृति के होते है. साथ ही इसका उपयोग लोगों को झूठा बताने और राजनेताओं की डिजिटल रूप से परिवर्तित क्लिप भी वायरल की जाती है. कुछ साल पहले, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को व्यापक रूप से प्रसारित एक डीपफेक वीडियो में डोनाल्ड ट्रम्प को पूरी तरह से मूर्ख कहते हुए देखा गया था.

इसी तरह, मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को ऐसे ही एक अन्य वीडियो में “अरबों लोगों के चुराए गए डेटा पर पूर्ण नियंत्रण” होने का दावा करते देखा गया था.

कितने प्रकार का होता है डीपफेक?

  • फेस-स्वैपिंग: इस तरह के डीपफेक कंटेंट में लोग किसी के चेहरे पर किसी और का चेहरा लगा देते हैं और गलत तरह की जानकारी फैलाते हैं. फेस-स्वैपिंग का इस्तेमाल फ्रॉड के लिए खूब किया जाता है.
  • एक तरह के डीपफेक कंटेंट में ठग ओरिजिनल आवाज की कॉपी करते हैं और फिर इसके जरिए अलग-अलग स्कैम को अंजाम दिया जाता है. ठग AI की मदद से हूबहू ओरिजिनल आवाज की तरह ऑडियो को बनाते हैं और फोन पर भी लोगों से इसी आवाज में बात करते हैं.
  • बॉडी मूवमेंट और जेस्चर को भी AI की मदद से बदला जा सकता है. इससे वीडियो में वो चीज दिखाई जाती है जो ओरिजिनल नहीं है. जैसे अगर आपने किसी काम के लिए ना का इशारा किया है तो इसे ठग AI की मदद से हां के मूवमेंट में बदल देंगे.
  • टेक्स्ट बेस्ड डीपफेक में ठग या स्कैमर किसी के राइटिंग स्टाइल को कॉपी करते हैं. फिर इसके आधार पर झूठे मैसेज, मेल आदि भेजे जाते हैं
  • ऑब्जेक्ट मैनिपुलेशन: AI डीपफेक के जरिए बॉडी और फेस के अलावा ऑब्जेक्ट को भी रिप्लेस किया जा सकता है. इस तरह की वीडियो में ऑब्जेक्ट को बदलकर वीडियो का मीनिंग ही बदल दिया जाता है. जैसे अगर आपने हाथ में पानी का बोतल लिया हुआ है तो इसे बदलकर ठग शराब या कुछ और भी कर सकते हैं.
  • हाइब्रिड डीपफेक: इस तरह की डीपफेक वीडियो में तमाम चीजों को मिक्स कर कंटेट को बदला जाता है.जैसे आवाज, चेहरा, ऑब्जेक्ट आदि सबकुछ एकदम बदल दिया जाता है.
  • फेक वेबसाइट भी AI की मदद से बनाई जाती हैं ताकि यूजर्स की जानकारी चुराई जा सके.

DeepFake Technology | डीपफेक के सकारात्मक एवं नकारात्मक उपयोग?

  • कृत्रिम प्रज्ञान (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/एआई)-जनित कृत्रिम मीडिया या डीपफेक  के कुछ क्षेत्रों में स्पष्ट लाभ हैं, जैसे पहुंच, शिक्षा, फिल्म निर्माण, आपराधिक फोरेंसिक एवं कलात्मक अभिव्यक्ति।
  • यद्यपि, जैसे-जैसे कृत्रिम मीडिया प्रौद्योगिकी की पहुँच में वृद्धि होती है, वैसे-वैसे शोषण का जोखिम भी बढ़ता है। डीपफेक का इस्तेमाल प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाने, सबूत गढ़ने, जनता को धोखा देने तथा लोकतांत्रिक संस्थानों में विश्वास कम करने के लिए किया जा सकता है।
  • यह सब कुछ अल्प संसाधनों के साथ, स्तर एवं गति के साथ प्राप्त किया जा सकता है एवं यहां तक ​​कि समर्थन को प्रेरित करने के लिए सूक्ष्म-लक्षित भी किया जा सकता है।

डीपफेक बनाने वाले एप (Apps)

डीपफेक बनाने की प्रकिया जटिल है लेकिन इसके साफ्टवेयर तक पहुंच आसान है । कई एप नए लोगों के लिए भी डीपफेक बनाना आसान बना देते हैं। जैसे चीनी एप जेडएओ, डीपफेस लैब, फेकएप और फेस स्वैप । यही नहीं ओपन सोर्स डेवलपमेंट कम्युनिटी GitHub पर बड़ी संख्या में डीपफेक साफ्टवेयर उपलब्ध हैं।

Top 5 Deep Fake वीडियो बनाने वाले AI टूल की लिस्ट ( Top 5 AI Deep Fake Tools In Hindi)

Deepfakesweb AI Tool

Deepfakesweb AI यह एक बहुत ही पॉपुलर डीप फेक वीडियो मेकर टूल है जिसका उपयोग करके आप अपना या किसी और व्यक्ति का भी हाई क्वालिटी डीप फेक वीडियो या इमेज बना सकते है यह एक पेड टूल है इसका इसका प्रति घंटा चार्ज 4$ है

DeepFaceLab AI Tool

डीपफेसलैब डीपफेक वीडियो या इमेज बनाने के लिए बहुत ही पॉपुलर सॉफ्टवेयर है। 95% से अधिक डीपफेक वीडियो DeepFaceLab के साथ बनाए जाते हैं। यह टूल ओपन सोर्स और फ्री है इसको डाउनलोड करके आप भी डीप फेक वीडियो बना सकते है।

AI or Not AI Deep Fake Tool

एआई या नॉट एक ऑनलाइन सर्विस है जो यूजर को जल्दी और सटीक रूप से यह निर्धारित करने में मदद करती है कि कोई फोटो या इमेज एआई द्वारा बनाई गई है या किसी मानव द्वारा बनाई गई है। इस टूल के द्वारा आप इमेज जेनेरेट करके किसी और व्यक्ति की इमेज से रेप्लस कर सकते है ।

यदि इमेज एआई के द्वारा generate की है है, तो हमारी सेवा उपयोग किए गए AI मॉडल (mid-journey, stable diffusion, या DALL-E) की पहचान करती है।

Lensa AI Deep Fake AI Tool

लेंसा एआई एक बहुत ही पॉपुलर ऐप है जो आपके या किसी और के एआई पोर्ट्रेट बनाने के काम में आता है । इस टूल का उपयोग कर के आप किसी की इमेज को दूसरे की इमेज में बदल सकते है किन्तु ये बिल्कुल डीपफेक नहीं है कि यह आपका चेहरा दूसरे लोगों के शरीर पर या वीडियो में डाल देगा। हालाँकि, लेंसा एआई में कुछ सेल्फी से आपके फोटोरिअलिस्टिक पोर्ट्रेट बनाने की बेहद शानदार क्षमता है। इसके अलावा, ऐप सुपरहीरो, एनीमे और अन्य सहित कई शैलियों में चित्र बनाता है।

Reface AI Deep Fake AI Tool –

Reface AI एक डीपफेक इमेज या gif बनाने के लिए बहुत पॉपुलर ऐप है या इसका उपयोग आप मज़ेदार GIF मेम्स बनाने में आपकी मदद करता है पहले ये Doublicat नाम से आता था । अब Doublicat के डेवलपर्स ने ऐप का नाम बदलकर Reface AI के बाद Reface कर दिया है। रिफेस एआई के बैकेंड में जेनरेटिव एडवरसैरियल नेटवर्क (जीएएन) है। ऐप का उपयोग करने के लिए, आपको बस अपनी तस्वीर खींचनी है और फिर वह GIF चुनना है जिसका आप उपयोग करना चाहते हैं। इस टूल का उपयोग करके आप किसी का भी डीप फेक इमेज बना सकते है ।

FAQ about deepfake technology in hindi

Q : डीप फेक टेक्नोलॉजी कब डेवलप की गई?

Ans : 1990

Q : भारत में डीप फेक टेक्नोलॉजी फ्री है क्या?

Ans : हां फ्री और पेड दोनों तरह के है

Q : डीप फेक वीडियो डिटेक्शन वाला टूल कौन सा है?

Ans : sensity

Q : क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से डीप फेक वीडियो बना सकते हैं?

Ans : हां

Q : क्या डीप फेक टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल हो सकता है?

Ans : जी हां!


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