Munshi Premchand Jayanti, Essay, Quotes, Story, Poem: मुंशी प्रेमचंद.

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  • Content.
  • मुंशी प्रेमचंद जी का जीवन परिचय व प्राम्भिक शिक्षा (Essay in Hindi).
  • Munshi Premchand Jayanti (मुंशी प्रेमचंद जयंती).
  • मुंशी प्रेमचंद जी का ब्रिटिश सरकार की नौकरी त्यागना।
  • मुंशी प्रेमचंद जी की मृत्यु।
  • Munshi Premchand Story in Hindi (प्रेमचन्द की हिंदी कहानियां).
  • प्रेमचंद जी का गोरखपुर से जुड़ाव
  • Munshi Premchand Quotes In Hindi.
  • Munshi Premchand Quotes In English.
  • Premchand Poem in HINDI – मुंशी प्रेमचंद कविता हिंदी में।

मुंशी प्रेमचंद जी का जीवन परिचय व प्राम्भिक शिक्षा (Essay in Hindi).

प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गाँव में हुआ। उनकी माता का नाम आनन्दी देवी था तथा उनके पिता का नाम मुंशी अजायबराय था। उनकी प्राम्भिक शिक्षा उर्दू, फारसी से हुई. प्रेमचंद्र जी को बचपन से ही लिखने व पढ़ाने का बहुत शौक था. इसी शौक के चलते 13 साल की उम्र में ही उन्‍होंने तिलिस्म-ए-होशरुबा  पढ़ लिया। सन्न 1898 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे एक स्थानीय विद्यालय में शिक्षक नियुक्त हो गए।

सन्न 1910 में मुंशी प्रेमचंद्र जी ने अंग्रेजी, दर्शन, फारसी और इतिहास लेकर इंटर पास किया और 1919 में बी.ए. पास करने के बाद शिक्षा विभाग के इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हुए। लेकिन इसके बाद मंत्र सात वर्ष की अवस्था में उनकी माता तथा चौदह वर्ष की अवस्था में पिता का देहान्त हो जाने के कारण उनका प्रारंभिक जीवन संघर्षमय हो गया. इतिहासकारो के मुताबित उनका पहला विवाह उन दिनों की परंपरा के अनुसार पंद्रह साल की उम्र में हुआ जो किसी कारणवश सफल नहीं रह सका। इसके बाद प्रेमचंद्र जी ने विधवा-विवाह का समर्थन किया और 1906 में दूसरा विवाह अपनी प्रगतिशील परंपरा के अनुरूप बाल-विधवा शिवरानी देवी से किया।

Munshi Premchand Jayanti (मुंशी प्रेमचंद जयंती).

आज महान कथा व कहानी के सम्राट कहे जाने वाले प्रेमचंद (Munshi Premchand) जी की 125वीं जयंती (jayanti) है। मुंसी प्रेमचद्र जी का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस के लमही गाँव में हुआ था।  प्रेमचंद का आधिकारिक नाम धनपत राय था। प्रेमचंद जी के पिताजी का नाम मुंशी अजायब लाल जी तथा उनकी माता जी का नाम आनन्दी देवी था। प्रेमचंद आजादी से पहले शिक्षा विभाग में डिप्टी इंस्पेक्टर थे।

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मुंशी प्रेमचंद जी का ब्रिटिश सरकार की नौकरी त्यागना।

आप को बता दें की 1921 में मुंशी प्रेमचंद जी ने ब्रिटिश सरकार की नौकरी छोड़ दी और लेखन और प्रकाशन को अपना पूर्णकालिक पेशा बनाते हुए, गोदान, गबन, कर्मभूमि, निर्मला, सेवा सदन इत्यादि उपन्यासों समेत उन्होंने करीब ढाई सौ कहानियाँ लिखीं। प्रेमचंद ने हंस, माधुरी और जागर जैसी पत्र-पत्रिकाओं का संपादन भी किया।

मुंशी प्रेमचंद जी की मृत्यु।

हिन्दी के इस यशस्वी पुत्र अर्थात प्रसिद्ध उपंन्यासक ने आठ अक्टूबर 1936 को अंतिम साँस ली। लेकिन आज भी वह हमारे दिलो में जिन्दा है।

प्रेमचंद जी का गोरखपुर से जुड़ाव

क्या आप जानते है की जब मुंशी प्रेमचन्द (बचपन में धनपत राय) के पिता की गोरखपुर पोस्टिंग हुई तब इसी रावत पाठशाला में उनकी शिक्षा शुरू हुई थी। इसे संयोग कहे या विडंबना कि प्रेमचंद जहां पढ़े उसी के पास नार्मल स्कूल में 1916 से 1921 तक बतौर शिक्षक उन्होंने नौकरी भी की।अपनी प्राथमिक शिक्षा के बाद धनपत राय (प्रेमचद्र जी) ने मिशनरी स्कूल से अंग्रेजी पढ़ी तथा इसके बाद कई अंग्रेजी लेखकों की किताबें पढना शुरू कर दिया। उन्होंने अपना पहला साहित्यिक काम गोरखपुर से उर्दू में शुरू किया।

Munshi Premchand Story in Hindi (प्रेमचन्द की हिंदी कहानियां).

वैसे तो मुंशी प्रेमचद्र जी ने बहुत सी कहानी व उपंन्यासः लिखे है, परन्तु हम आप के साथ कुछ प्रसिद्ध उपन्यास व कहानी को साझा करेंगे (बताना चाहेंगे). Munshi Premchand Story in Hindi इस प्रकार है – ‘कफन’, ‘ईदगाह’, ‘नमक का दरोगा’, ‘रामलीला’, ‘बूढी काकी’, ‘मंत्र’, ‘गबन’ और ‘गोदान’ आदिप्रेमचन्द की इन हिंदी कहानियों में ईदगाह सबसे प्रसिद्ध है। इसके अलावा ‘नमक का दरोगा’, ‘रामलीला’, गोदान जैसी प्रेमचंद की तमाम कहानियों और उपान्यासों के पात्र गोरखपुर और आसपास के क्षेत्र से लिए गए बताए जाते हैं।

Munshi Premchand Quotes In Hindi.

कुल की प्रतिष्ठा भी विनम्रता से होती है, हेकड़ी और रुआब दिखाने से नहीं।” ~मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद्र।

जिस प्रकार नेत्रहीन के लिए दर्पण बेकार है उसी प्रकार बुद्धिहीन के लिए विद्या (ज्ञान) बेकार है।” 

मुंशी प्रेमचंद

युवावस्था आवेशमय होती है, वह क्रोध से आग हो जाती है तो करुणा से पानी हो जाती है।” ~ मुंशी प्रेमचंद

देश का उद्धार विलासियों से नहीं हो सकता। उसके लिए सच्चा त्याग होना जरुरी है।” ~मुंशी प्रेमचंद

जीवन की दुर्घटनाओं में अक्‍सर बड़े महत्‍व के नैतिक पहलू भी छिपे होते हैं!” ~ मुंशी प्रेमचंद

Munshi Premchand Quotes In English.

“Beauty does not need ornaments. Softness can’t bear the weight of ornaments.” 

Munshi Premchand

“What the world calls sorrow is really a joy to the poet.” 

 Premchand

People are so selfish. Those you help are the ones who turn against you.

Munshi Premchand Quotes

What people think in their heart gets out, no matter how much they try to hide it.

Premchand Poem in HINDI – मुंशी प्रेमचंद कविता हिंदी में।

क़लम के जादूगर!
अच्छा है,
आज आप नहीं हो|
अगर होते,
तो, बहुत दुखी होते|
आप ने तो कहा था
कि, खलनायक तभी मरना चाहिए,
जब,
पाठक चीख चीख कर बोले,
मार – मार – मार इस कमीने को|
पर,
आज कल तो,
खलनायक क्या?
नायक-नायिकाओं को भी,
जब चाहे ,
तब,
मार दिया जाता है|
फिर जिंदा कर दिया जाता है|
और फिर मार दिया जाता है|
और फिर,
जनता से पूछने का नाटक होता है-
कि अब,
इसे मरा रखा जाए?
या जिंदा किया जाए?
सच,
आप की कमी,
सदा खलेगी –
हर उस इंसान को,
जिसे
मुहब्बत है,
साहित्य से,
सपनों से,
स्वप्नद्रष्टाओं,
समाज से,
पर समाज के तथाकथित सुधारकों से नहीं|
हे कलम के सिपाही,
आज के दिन
आपका सब से छोटा बालक,
आप के चरणों में
अपने श्रद्धा सुमन,
सादर समर्पित करता है |

Premchand Poem in HINDI – मुंशी प्रेमचंद कविता हिंदी में।

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