National Girl Child Day 2022: 24 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता हैं राष्ट्रीय बालिका दिवस, जानिए इतिहास और उद्देश्य

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भारत में हर साल 24 जनवरी राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day 2022) के तौर पर मनाया जाता है। देश की बेटियों की आज लगभग हर क्षेत्र में हिस्सेदारी है लेकिन एक दौर ऐसा था, जब लोग बेटियों को कोख में ही मार दिया करते हैं। बेटियों का जन्म हो भी गया तो बाल विवाह की आग में धकेल देते थे। बेटियों और बेटों में भेदभाव, उनके साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ देश की आजादी के बाद से ही भारत सरकार प्रयासरत हो गई थी। बेटियों को देश की प्रथम पायदान पर लाने के लिए कई योजनाएं और कानून लागू किए गए। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाए जाने की शुरुआत हुई। देश की बेटियों को सशक्त बनाने के लिए जागरूकता बढ़ाने वाले इस खास दिन को 24 जनवरी को मनाने की भी खास वजह है। यह वजह भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ी हुई है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day) कब है?

हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 2009 से हुई। महिला बाल विकास मंत्रालय ने पहली बार साल 24 जनवरी 2009 को देश में राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया।

राष्ट्रीय बालिका दिवस का इतिहास (History Of National Girl Child Day)

राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत पहली बार 2008 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा की गई थी. इस दिवस का उद्देश्य समाज में लड़कियों के साथ हो रहे भेदभाव के बारे में जागरूकता फैलाना है और बेटियों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव लाना है.

राष्ट्रीय बालिका दिवस का महत्व (Importance Of National Girl Child Day)

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य बालिकाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना है. हर साल इस दिन राज्य सरकारें अपने-अपने जागरूकता की पहल करती हैं. राष्ट्रीय बालिका दिवस के अलावा, 11 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाया जाता है. कन्या भ्रूण हत्या से लेकर लैंगिक असमानता से लेकर यौन शोषण तक, मुद्दों की कोई कमी नहीं है. इसके पीछे मुख्य उद्देश्य लड़कियों के सामने आने वाली असमानताओं को उजागर करना, बालिकाओं के अधिकारों सहित जागरूकता को बढ़ावा देना, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण का महत्व है. आजकल भी लैंगिक भेदभाव एक बड़ी समस्या है, जिसका सामना लड़कियों या महिलाओं को जीवनभर करना पड़ता है.

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24 जनवरी को क्यों मनाया जाता है बालिका दिवस?

हर साल 24 जनवरी को बालिका दिवस के तौर पर मनाने की एक खास वजह है। यह वजह इंदिरा गांधी से जुड़ी हुई है। साल 1966 में इंदिरा गांधी ने देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। भारत के इतिहास और महिलाओं के सशक्तिकरण में 24 जनवरी का दिन महत्वपूर्ण है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस 2022 की थीम (National Girl Child Day 2022 Theme)

प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय बालिका दिवस की विषय वस्तु अलग होती है। पिछले वर्ष 2021 की थीम ‘डिजिटल पीढ़ी, हमारी पीढ़ी’ थी जबकि वर्ष 2020 में राष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम ‘मेरी आवाज, हमारा समान भविष्य’ थी। वर्ष 2022 बालिका दिवस की थीम अभी तक घोषित नहीं हुई है।

बालिका दिवस (National Girl Child Day 2022) का उद्देश्य क्या है?

यह दिन मनाने की वजह देश की बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। समाज में बालिकाओं के साथ होने वाले भेदभाव के बारे में देश की बेटियों के साथ ही सभी लोगों को जागरूक करना है। इस दिन हर साल राज्य सरकारें अपने अपने प्रदेश में जागरूक कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं।

National Girl Child Day 2022 Quotes in Hindi

न अपनी दुनिया स्वयं मिटाओ, होश में आओ, बेटी बचाओ.

हर जंग में हार जाओगे, अगर बेटी को ना अपनाओगे.

इज्जत एक लड़की की वो तब तक समझ नही पाता,

बाप एक बेटी का वो जब तक बन नहीं जाता.

इक लड़की जब बेटी से बहू हो जाती हैं,

जिम्मेदारी के उलझन में जीना भूल जाती है.

जो बेटा-बेटी में करता फ़र्क है,

उसका जीवन यहीं पर नर्क है.

National Girl Child Day 2022: आत्मनिर्भर कार्यक्रम

National Girl Child Day 2022: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा कई कार्यक्रम चलाये जा रहे है। महिला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बालिकाओं की सेहत, पोषण व पढ़ाई जैसी चीज़ों पर ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है ताकि बड़ी होकर वे शारीरिक, आर्थिक, मानसिक व भावनात्मक रूप से आत्मनिर्भर व सक्षम बन सकें।

Read in English: National Girl Child Day: Theme, History, Quotes, Significance, Help Girls

राष्ट्रीय बालिका शिशु दिवस मनाने का उद्देश्य (Aim of National Girl Child Day in Hindi)

  • समाज में बालिका शिशु के लिये नये मौके देता है और लोगों की चेतना को बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय कार्य के रुप में इसे मनाया जाता है।
  • भारतीय समाज के बालिका शिशुओं के द्वारा सामना किये जा रहे है असमानता को हटाना।
  • ये सुनिश्चित किया जाये कि भारतीय समाज में हर बालिका शिशु को उचित सम्मान और महत्व दिया जा रहा है।
  • ये सुनिश्चित किया जाये कि देश में हर बालिका शिशु को उसके सभी मानव अधिकार मिलेंगे।
  • भारत में बाल लिंगानुपात के खिलाफ कार्य करना तथा बालिका शिशु के बारे में लोगों का दिमाग बदलना है।
  • बालिका शिशु के महत्व और भूमिका के बारे में जागरुकता बढ़ाने के द्वारा बालिका शिशु की ओर दंपत्ति को शुरुआत करनी चाहिये।
  • उनके स्वास्थ्य, सम्मान, शिक्षा, पोषण आदि से जुड़े मुद्दों के बारे में चर्चा करना।
  • भारत में लोगों के बीच लिंग समानता को प्रचारित करना।

भारत में बालिका शिशु के अधिकार

  • गर्भावस्था में क्लिनिकों के द्वारा लिंग पता करने को सरकार द्वारा गैर कानूनी करार दिया गया है।
  • बाल विवाह निषेध है।
  • कुपोषण, अशिक्षा, गरीबी और समाज में शिशु मृत्यु दर से लड़नें के लिये सभी गर्भवती महिलाओं के लिये प्रसवपूर्व देख-रेख को जरुरी बना दिया है।
  • बालिका शिशु को बचाने के लिये सरकार द्वारा “बालिका शिशु को बचाओ” योजना की शुरुआत की गयी है।
  • मुफ्त और आवश्यक प्राथमिक स्कूल के द्वारा भारत में बालिका शिशु शिक्षा की स्थिति में सुधार हुआ है।
  • भारत में बालिका शिशु की स्थिति को सुधारने के लिये महिलाओं के लिये स्थानीय सरकार में एक-तिहाई सीट भारतीय सरकार ने आरक्षित रखी है।
  • महिलाओं की स्थिति और रोजगार के मौंके को बढ़ाने के लिये कानून द्वारा एमटीपी विरोधी, सती कानून विरोधी, दहेज विरोधी एक्ट भी लाया गया है।
  • देश के पिछड़े राज्यों में शिक्षा की स्थिति की ओर ध्यान दिलाने के लिये पंचवर्षीय योजना को लागू किया गया है।
  • स्कूली बच्चों को यूनिफार्म, दोपहर का खाना, शैक्षणिक वस्तु दी जाती है तथा एससी और एसटी जाति के लड़कियों के परिवारों को धन वापसी किया जाता है।
  • प्राथमिक स्कूलों को जाना और छोटी बच्चियों का ध्यान देने के लिये बलवड़ी-कम-पालना घर को लागू कर दिया गया है।
  • स्कूल सर्विस को उन्नत बनाने और शिक्षकों की शिक्षा के लिये “ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड” सहित दूसरे कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं।
  • पिछड़े इलाकों की लड़कियों की आसानी के लिये मुक्त शिक्षा व्यवस्था की स्थापना की गयी है।
  • बालिका शिशु के लिये ये घोषित किया गया है कि उनके लिये मौकों को और बढ़ाने के लिये “लड़कियों के साथ बराबरी का व्यवहार और मौके दिये जाने चाहिये”।
  • ग्रामीण इलाकों की लड़कियों के लिये बेहतर जीवन बनाने के लिये मुख्य नीति के रुप में सरकार द्वारा स्वयं सहायता समूह को आरंभ किया है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस कैसे मनाया जाता है?

राष्ट्रीय बालिका दिवस के तहत ढेरों कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. इस आयोजन में लड़की बचाओ अभियान, सही लिंग अनुपात तथा लड़कियों के लिए स्‍वस्‍थ्‍य एवं सुरक्षित माहौल तैयार करने जैसे कार्यक्रम किये जाते है.


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