New CJI: जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) के नाम पर राष्ट्रपति ने लगाई मुहर, 9 नवंबर को लेंगे शपथ

New CJI DY Chandrachud [Hindi] 9 नवंबर को लेंगे शपथ डीवाई चंद्रचूड़
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New CJI DY Chandrachud [Hindi]: राष्ट्रपति ने जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ को देश का अगला चीफ जस्टिस (Chief Justice) नियुक्त किया है. 9 नवंबर से पद संभालने वाले जस्टिस चंद्रचूड़ देश के 50वें मुख्य न्यायाधीश होंगे. उनका कार्यकाल 10 नवंबर 2024 तक होगा. वह जस्टिस यूयू ललित (UU Lalit) का स्थान लेंगे, जो 8 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट करके ये जानकारी दी.

कौन हैं जस्टिस चंद्रचूड़ (Who is Justice DY Chandrachud)

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. वह इस पद पर नियुक्त होने से पहले, 29 मार्च 2000 तक बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे. बंबई उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ (Who is Dhananjaya Y. Chandrachud) को जून 1998 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पदस्थ किया और उन्हें उसी साल अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था.

दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स करने के बाद न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैम्पस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री ली और अमेरिका के हार्वर्ड लॉ स्कूल से ज्यूरिडिकल साइंस में डॉक्टरेट तथा एलएलएम की डिग्री ली. उन्होंने उच्चतम न्यायालय और बंबई उच्च न्यायालय में वकालत की और मुंबई विश्वविद्यालय में संवैधानिक कानून के अतिथि प्रोफेसर भी रहे.

New CJI DY Chandrachud [Hindi] | डीवाई चंद्रचूड़ के पिता भी रहे हैं सीजेआई

मई 2016 में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट के जज का पदभार संभाला था. उनके पिता वाईवी चंद्रचूड़ भी देश के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. वाईवी चंद्रचूड़ के नाम पर सबसे लंबे समय तक सीजेआई रहने का रिकॉर्ड भी दर्ज है. वह 1978 से 1985 तक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे थे.

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9 नवंबर को लेंगे शपथ डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud

मौजूदा सीजेआई उदय उमेश ललित के 65 वर्ष की आयु पूरी कर लेने पर रिटायर हो जाने के एक दिन बाद 9 नवंबर को जस्टिस चंद्रचूड़ चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ लेंगे. जस्टिस ललित का 74 दिनों का संक्षिप्त कार्यकाल रहा, जबकि सीजेआई के पद पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ का कार्यकाल दो वर्षों का होगा. जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2024 को रिटायर होंगे.

10 नवंबर, 2024 तक CJI का पद संभालेंगे चंद्रचूड़

जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर, 2024 तक सीजेआई का पद संभालेंगे। डी.वाई. चंद्रचूड़ के पिता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वाई.वी. चंद्रचूड़ सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले सीजेआई रहे थे। वह 1978 से 1985 के बीच लगभग सात साल, चार महीने इस पद पर रहे। उनके कार्यकाल के दौरान जज बेटे न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ ने अपने पिता के दो फैसलों को पलट दिया था, जो व्यभिचार और निजता के अधिकार से संबंधित थे।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) के अहम फैसले

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने वकालत के करियर के दौरान कई बड़े फैसले दिए हैं.

  • इनमें अविवाहित महिला को गर्भपात की इजाजत देने का फैसला
  • समलैंगिक सेक्स को अपराध की श्रेणी से बाहर करना
  • राइट टु प्राइवेसी एक्ट के तहत निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार करार देना
  • नोएडा में सुपरटेक के ट्विन टावर गिराने का फैसला
  • कथित लव जिहाद से जुड़े केरल के हादिया केस जैसे अहम मामलों में फैसला सुनाना शामिल है.

CJI ललित ने ही जस्टिस चंद्रचूड़ के नाम की सिफारिश की

बीते 11 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) यूयू ललित ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर वरिष्ठतम न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के नाम की केंद्र से सिफारिश की थी. कई संवैधानिक पीठों और अयोध्या भूमि विवाद, निजता का अधिकार से जुड़े मामलों समेत शीर्ष न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ देश के 50वें सीजेआई बनेंगे. न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने थे.

New CJI DY Chandrachud [Hindi] | दिल्ली यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई

जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता वाईपी चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट के 16वें मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. जस्टिस चंद्रचूड़ ने दिल्ली के सेंट कोलंबिया स्कूल और सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई की. उन्होंने 1982 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ लॉ (Bachelor of Laws) की डिग्री ली. इसके बाद 1983 में हार्वर्ड लॉ स्कूल से मॉस्टर्स ऑफ लॉ (Master of Laws) की डिग्री ली.

उन्होंने फली एस नरीमन के साथ कुछ समय कार्य किया. फिर सुलीवन एंड क्रॉमवेल ( Sullivan and Cromwell) कंपनी में वकालत की. 1998 में वे बांबे हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट बने. फिर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया की जिम्मेदारी निभाई. 

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पहले रह चुके इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

29 मार्च 2000 को हाईकोर्ट के जज बने. इसके बाद 31 अक्टूबर 2013 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Allahabad High Court Chief Justice) नियुक्त किए गए. इसके बाद 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट में जज बने. वहीं, 24 अप्रैल 2021 को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के नामों की सिफारिश करने वाली कॉलेजियम का हिस्सा बने. अब 9 नवंबर को देश के 50वें चीफ जस्टिस (50th Chief Justice of India) के तौर पर शपथ लेंगे.

New CJI DY Chandrachud [Hindi] | कानून मंत्री किरण रिजिजू ने दी जानकारी

रिजिजू ने ट्वीट किया, ‘संविधान के द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए माननीय राष्ट्रपति ने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ को देश का प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया है. यह नियुक्ति 9 नवंबर 2022 से प्रभावी होगी.’ बता दें कि भारत के मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित 8 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं. उन्होंने हाल ही में जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ को अपने उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया. राष्ट्रपति की मुहर के बाद अब वो 50वें सीजेआई बन जाएंगे.

1998 से 2000 तक भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में किया काम

New CJI DY Chandrachud [Hindi] | जस्टिस चंद्रचूड़ ने बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस की है। उन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज, नई दिल्ली से अर्थशास्त्र में ऑनर्स के साथ बीए पास किया और कैंपस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने 1998 से 2000 तक भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में भी कार्य किया। उन्हें पहली बार 29 मार्च, 2000 को बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था।

2016 को बने थे सुप्रीम कोर्ट के जज

11 नवंबर 1959 को पैदा हुए जस्टिस चंद्रचूड़ को 13 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। वह सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति से पहले 31 अक्टूबर 2013 से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ इससे पहले 29 मार्च 2000 से बाम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे। उन्होंने 1998 से बॉम्बे हाई कोर्ट में जज के रूप में अपनी नियुक्ति तक भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में भी काम किया था। उन्हें जून 1998 में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था।


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