Savitribai Phule: Quotes, Image,Videos, Hindi Essay: Fresh news.

Do you know? Today whole India is remembering Savitribai Phule on his 186th birth anniversary. Q. Who was Savitribai Phule? Answer: Savitribai Phule was India’s 1st Women Teacher. To know more read his quotes, Hindi essay and watch his videos. and also read this Hindi blog: Hindi news via Fresh News India.

भारत की पहली महिला शिक्षिका (India’s First Women Teacher) सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule)

नई दिल्‍ली, समाजसुधारक, समाज मे महिलाओं को सम्मान दिलाने और शिक्षा की ओर अग्रसर करने वाली सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) देश की प्रथम महिला शिक्षिका (First Women Teacher) थी।

आज देश मे सरकारें महिलाओं को हर क्षेत्र में अग्रिणी करने की हर संभव कोशिश कर रही है। लेकिन जो सरकार आज कर रही है यह कार्य देश की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) ने 19वीं सदी में ही आरंभ कर दिया था ।

Pankaj Singh’s Tweet.

भारत की प्रथम महिला शिक्षिका और समाजसेवी सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र स्थित सतारा के एक छोटे से गांव नायगांव में हुआ था । सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) का ज्योतिबा फुले (Jyotiba Phule) से विवाह सिर्फ 9 साल की उम्र में ही हो गया था । उस समय ज्योतिराव फुले की उम्र भी 12 साल ही थी । ज्‍योतिबा फुले (Jyotiba Phule) भी एक समाजसेवी थे और इसी के साथ वह लेखन का कार्य भी करते है।


सावित्रीबाई (Savitribai) और ज्योतिबा (Jyotiba) की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने यशवंतराव को गोद लिया था। सावित्रीबाई फुले को भी पढ़ना-लिखना पति ज्योतिराव ने ही सिखाया था ज्‍योतिबा फुले (Jyotiba Phule) ने अपने समाजसेवा का कार्य स्त्रियों की दशा सुधारने और समाज में उन्‍हें पहचान दिलाने के साथ शुरू किया । जिसमें उन्होंने समाज मे स्त्रियों को शिक्षा और उन्हे आत्मनिर्भर होने के लिये सन 1854 में पुणे में एक स्‍कूल खोला था । दरसल यह देश का पहला ऐसा स्‍कूल भी बना था । जो सिर्फ और सिर्फ लड़कियों के लिए खोला गया था । जिसमें कुल नौ लड़कियों ने दाखिला लिया था ।

स्कूल तो खोल दिया गया था लेकिन स्कूल में लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया था । इसी के साथ सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) देश की प्रथम महिला शिक्षिका भी बन गयी थी सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) ने ही भारत में लड़कियों के लिए शिक्षा के दरवाजे खोलने का काम जोर-शोर से किया ।

Video Credit: DoordarshanNational

दरसल आजादी से पहले पुणे बॉम्बे प्रेसिडेंसी में स्थित था। ब्रिटिश शासकों ने फुले दंपति की समाज सुधार के कार्यक्रम को सराहा ओर इसी के लिए फुले दंपति को महिला शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए 1852 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने सम्मानित भी किया। ओर उनके लड़कियों को समाज मे सम्मान दिलाने में उनकी मदद करि । 19वी सदी में हिन्दू धर्म में बाल विवाह काफी प्रचलित था या यूं कहें की गलत प्रथा थी । उस समय मृत्यु दर अधिक होने के कारण कई लड़कियां बाल विधवा हो जाया करती थी ।वही बाल विधवा हुई लड़कियों का विवाह इन परम्पराओं के चलते समाज मे नही हो पाता था । फुले दंपति ने बाल विवाह के खिलाफ भी सामाजिक सुधार आंदोलन चलाया

सावित्रीबाई फुले ने सन 1897 में अपने बेटे यशवंतराव के साथ मिलकर अस्पृश्य माने जाने प्लेग रोग से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए अस्पातल भी खोला था। पुणे स्थित इस अस्पताल में सावित्री बाई मरीजो का देखभाल करते थी और उनके बेटे यशवंतराव मरीजों का इलाज करते थे । मरीजों की देखभाल करते हुए सावित्रीबाई फुले खुद भी इस बीमारी की शिकार हो गईं और उनका देहांत 10 मार्च 1897 को हो गया ।

समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले शिक्षिका होने के साथ-साथ कवयित्री भी । उन्होंने अपने इस हुनर के साथ उन्होंने 2 काव्य पुस्तकें लिखीं- काव्य फुले, बावनकशी सुबोधरत्नाकर। केंद्र और महाराष्ट्र सरकार ने सावित्रीबाई फुले की स्मृति में कई पुरस्कारों की स्थापना की है । जिसमे सावित्री बाई ओर ज्योतिबा के नाम से एक डाक टिकट भी जारी किया गया है। वे आधुनिक शिक्षा प्रणाली में पहली महिला अध्यापिका थीं ।

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